Marital Discourse

Conflict हर किसी के वैवाहिक जीवन का एक सामान्य और आवश्यक पहलू है। जैसा कि एक शादी में रहते हुए पति-पत्नी अपने जीवन को इंटेग्रेट करने का प्रयास करते हैं जिसमें अनिवार्य रूप से वो अपने राय, व्यक्तिगत लक्ष्यों और दिनचर्या में obstacle का सामना करते हैं जिससे conflict की संभावना बढ़ती जाती है।

विवाह में conflicts का एक कारण यह है कि शादी में दो अलग तरह के लोग एक-दूसरे से आकर्षित होते हैं। आमतौर पर एक work-oriented व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करता है जो people oriented होता है। ऐसे में आपका जीवनसाथी आपके जीवन में एक ऐसा मसाला और change लाता है, जो पहले नहीं था। लेकिन शादी होने के बाद वही आकर्षण रिपेलेंट बन जाते हैं। आप छोटी-छोटी चिड़चिड़ाहट पर बहस करने लगते हैं जैसे गीले तौलिये से लेकर आर्थिक या बच्चों को संभालने जैसे मतभेदों पर। इस परिस्थिति में आपको आश्चर्य होगा कि आपकी पृष्ठभूमि और आपके व्यक्तित्व इतने अलग होते हुए भी आप अभी तक एक साथ क्यों हैं।

शादी में किसी एक का स्वार्थी होना Conflict होने की बहुत बड़ी वजह होती है। जब कोई एक सिर्फ अपनी बात रखता है और उसे ही मनवाने की कोशिश करता है ये जाने वगैर कि उसके पार्टनर की भी अपनी अलग राय हो सकती है। इन अंतरों को समझना और फिर उन्हें स्वीकार करना और समायोजित करना महत्वपूर्ण है।

किसी भी शादी को निभाने के लिए विश्वास की ज़रूरत होती है जो समय के साथ आती है। हम अगर सोचे कि ये रातोंरात हो जाये तो ये सही नहीं है। शादी में सबसे ज़रूरी है कि हम अपनी-अपनी सीमा बांध लें और दोनों उस सीमाओं का परस्पर सम्मान करें। अपने पार्टनर के असहमति को सहमति देना शुरू करें।
Marital discourse सिर्फ विचारों का मतभेद नहीं है बल्कि हमने इसे कैसे manage किया है, उसका परिणाम है।

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